दीपावली त्योहार- सबका त्योहार -कृष्णकांत आर्य

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दीपावली दीपों का त्योहार है, प्रकाश का त्योहार है, जीवन मे खुशियों का त्योहार है। इसे त्योहारो में सर्वश्रेष्ट त्योहार माना गया है। वास्तव में यह एक वैज्ञानिक एवं आवश्यक त्योहार भी कहा जा सकता है। वर्षा ऋतु में किसान खेत में बीज डालकर शकून महसूस करता है उसके बाद खेत में खरपतवार निदाई कोडाई करके फसल के प्रति आश्वान्वित हो जाता है कि उसकी फसल पककर तैयार हो जायेगी। यह फसल उसके एवं परिवार के भरण पोषण के लिए आशा की किरण लेकर आता है उसे यह अहसास होने लगता है कि इस फसल से अगले वर्षभर के लिए परिवार का भरण पोषण होगा। फसल से धन आयेगा, धन से कपड़े लत्ते खरीदे जायेगे। बच्चे बच्चियो की शादी के खर्चे भी इसी फसल से आशा रखकर किसान खुशीयो से भर जाता है। वर्षा ऋतु में घर के अंदर बैक्टीरिया, जीवाणु, फंगस आक्रमण करते है इसलिए घर की सफाई करता है इससे उसका मन प्रशन्नता से भर उठता है। इस खुशी को जाहीर करने और जीवन में प्रकाश का दीपक जलाकर आनंदित होता है।
दीवाली का त्योहार भगवान राम के लंका विजय के बाद आगमन पर खुशियाँ मनाने और दीपक जलाने की परंपरा से मुख्यत: जोड़ा जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है यह अच्छी बात है। जीवन में खुशियाँ आनी चाहिए प्रकाश के दीपक जलाना चाहिए। इसे जाहिर करने का कारण कुछ भी हो।यह दीवाली सबकी है गरीब हो या अमीर, शहरी हो या ग्रामीण, हिन्दू हो या अन्य धर्मावलंबी। इस त्योहार को सभी धर्मो के लोगो को मिलकर मनाना चाहिए हम तो कहते है समस्त पृथ्वी वासियो को इस त्योहार को एक साथ मिलकर मनाना चाहिए। इससे विश्वबंधुत्व की भावना प्रबल होगी भाई चारा बढ़ेगा और आजकल जो मारकाट का माहोल बना हुआ है उसमें सुधार होगा। समस्त मानव जाती का जीवन आनंद से भर जायेगा। फिर भी यह आनंद तो ऊपरी-ऊपरी होगा। जब जिदगी ही हमारी ऊपरी-ऊपरी है तो खुशियाँ भी ऊपरी-ऊपरी होगी। यह तो बाहर का दीपक है जो थोड़े समय के लिए प्रकाश देता है। दीपक का तेल खत्म होने से बत्ती बुझ जाती है। संत महात्मा कहते हैं – दिल का दीया जलाओ जिसका तेल कभी खत्म नही होता है। वास्तव में संतो की वाणी पर हमें अमल करनी चाहिए। तभी जीवन में वास्तविक दीवाली भीतर आयेगी जो स्थाई होगी और प्रभु से मिलाप होगा।

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