आदिवासियों की संस्कृति और परंपरा से है छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान- मुख्यमंत्री

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लोकवाणी समाचार // मुख्यमंत्री बघेल ने लोकवाणी में चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग एक तिहाई आबादी अनुसूचित जनजातियों की है। इन्होंनेे अपनी सोच, अपनी परंपरा, अपनी संस्कृति तथा अपने योगदान से छत्तीसगढ़ को एक विशेष पहचान दी है। अनुसूचित जनजाति के लोग अपनी जिन्दगी में रमे होते हैं। अपनी आकांक्षाएं मुखर करने में भी संकोच करते हैं। इसलिए आज के लोकवाणी का विषय ‘आदिवासी विकास-हमारी आस’ अत्यंत महत्वपूर्ण है। बघेल ने नारायणपुर के फरश कुमार तथा रामजी ध्रुव के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश में तेन्दूपत्ता संग्रहण मजदूरी को 2500 से बढ़ाकर 4000 रूपए प्रति मानक बोरा कर दिया है, ताकि संग्राहकों की आमदनी में तुरंत और सीधी बढ़ोत्तरी हो जाए। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि वर्ष 2019 में 15 लाख मानक बोरा से अधिक तेन्दूपत्ता संग्रहण हुआ, जिसके एवज में 602 करोड़ रूपए मजदूरी का भुगतान किया गया। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में 226 करोड़ रूपए अधिक है।

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